Thursday, July 30, 2026

जिस्म में लोहे सा दम या पैकेटबंद मौत का जहर

 शीर्षक:–जिस्म में लोहे सा दम या पैकेटबंद मौत का जहर


जहाँ आज हमारी आधुनिक और रफ्तार भरी जिंदगी ने हमें सुपरमार्केट की चमकीली पन्नी और फ्रिज के ठंडे जहर का गुलाम बना दिया है, वहीं अगर हम अपने पूर्वजों की उस सोंधी और प्राणवान थाली पर एक सरसरी नजर डालें, तो जमीन आसमान का यह ऐसा खौफनाक और चीरफाड़ करने वाला फर्क साफ दिखाई देता है कि जिसे पढ़कर आज की इस एस्प्रिन और इंसुलिन पर पलने वाली पीढ़ी की रूह काँप जाएगी और रगों में खौलता हुआ लावा दौड़ पड़ेगा। जरा सोचिए, उस दौर की मिसाल जब हमारे बुजुर्ग सुबह-सुबह कोहरे की चादर के बीच उठकर खेतों की उपजाऊ और रसायन-मुक्त मिट्टी से उपजे बाजरे, ज्वार और मक्के की उस सोंधी रोटी को अपने हाथों से मथकर निकाले गए शुद्ध और ताज़े मक्खन व गाढ़े देसी घी के साथ बड़े चाव से खाते थे, जो उनके जिस्म में लोहे जैसी फौलादी ताकत और हड्डियों में पहाड़ जैसा दम भर देता था, जबकि आज का यह कॉर्पोरेट युग में जीने वाला इंसान अपनी 24वीं-25वीं मंजिल के कांच वाले कमरों में बैठकर फैक्ट्रियों में जहरीले हेक्सेन केमिकल और हाई-टेंपरेचर की भट्टियों से पकाए गए उस तथाकथित 'रिफाइंड ऑयल' और मैदे से बनी जानलेवा ब्रेड-नूडल्स को गटक रहा है, जिसने महज तीस साल की उम्र में ही युवाओं को फैटी लिवर, हार्ट अटैक और कम उम्र की डायबिटीज जैसी लाइलाज बीमारियों का लाचार गुलाम बना डाला है। जरा कल्पना कीजिए उस प्राचीन संस्कृति की जहाँ ताँबे के बर्तन और मिट्टी के उस मटके का अमृत तुल्य शीतल जल पिया जाता था जो पेट की हर एक आग को शांत कर आंतरिक शुद्धि देता था, उसके मुकाबले आज का युवा अपनी प्यास बुझाने के लिए उन रंग-बिरंगी बोतलों में भरी कोल्ड ड्रिंक्स और सोडे को गटकता है जिनमें सात-सात चम्मच घुली हुई चीनी सीधे उसके अग्नाशय और हड्डियों को अंदर से दीमक की तरह चाट रही है, और तो और, जब हमारे पुरखों का खान-पान एक पवित्र संस्कार हुआ करता था जहाँ वे परिवार के साथ जमीन पर पालथी मारकर बैठते थे, हर एक कौर को इत्मीनान से 32 बार चबाकर अपनी लार के साथ अमृत बनाकर भीतर उतारते थे ताकि पाचन तंत्र हमेशा वज्र जैसा मजबूत रहे, तो इसके ठीक उलट आज का यह आधुनिक मानव डाइनिंग टेबल या ऑफिस की कुर्सियों पर एक हाथ में मोबाइल की नीली स्क्रीन पर अंतहीन रील्स को स्वाइप करते हुए और दूसरे हाथ में प्रिजर्वेटिव्स से सड़े हुए पैकेटबंद जंक फूड को बिना चबाए ऐसे गटक जाता है जैसे किसी मवेशी को चारा ठूसा जा रहा हो, जिसके परिणामस्वरूप आज हमारे पास भले ही स्वाद के नाम पर दुनिया भर के रेस्टोरेंट, महंगे पिज़्ज़ा-बर्गर और लाखों डिग्रियाँ मौजूद हों, लेकिन वह नैसर्गिक ऊर्जा, वह बुलंद हौसला और वह मानसिक सुकून हमेशा के लिए गायब हो चुका है जो कभी हमारे उन बुजुर्गों की थाली की शान हुआ करता था जो बिना किसी डॉक्टर, बिना किसी मेडिक्लेम और बिना किसी अस्पताल की देहरी लाँघे हँसते-खेलते सौ साल की फौलादी जिंदगी जी जाते थे, इसलिए अब भीवक्त है कि इस अंधी और विनाशकारी डिजिटल दौड़ से बाहर निकलकर अपनी जड़ों की उस सोंधी महक को पहचानिए, क्योंकि अगर अब भी नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें कोसेगी कि हमने स्वाद के चक्कर में अपनी सेहत, अपनी संस्कृति और अपनी नस्ल दोनों को बाजार के हाथों नीलाम कर दिया।


रील्स की चमक और अपनों की खामोश चीख: क्या हमने फोन को अपना सब कुछ मान लिया है?

शीर्षक: रील्स की चमक और अपनों की खामोश चीख.....क्या हमने फोन को अपना सब कुछ मान लिया है?



शाम की हल्की रोशनी जब ड्राइंग रूम की खिड़की से अंदर आती है, तो अमूमन वहाँ चाय की कपों की खनक, हँसी-मजाक और दिनभर के हाल-चाल गूँजा करते थे। लेकिन आज उस कमरे में एक अजीब सा, भारी सन्नाटा पसरा रहता है। सन्नाटा इस बात का नहीं कि वहाँ कोई नहीं है—वहाँ पूरा परिवार मौजूद है। माँ एक कोने में बैठी हैं, पिता जी दूसरे कोने में, और बेटा-बेटी अपनी-अपनी दुनिया में गुम हैं। अजीब बात यह है कि कोई किसी से बात नहीं कर रहा, सबके हाथों में स्क्रीन जल रही है, और मोबाइल की नीली रोशनी उनके चेहरों पर एक अजीब सा वीरानपन और कृत्रिम चमक छोड़ रही है।


हम एक ऐसी डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ अपनों से चंद कदम की दूरी पर बैठकर हम उन्हें रील्स भेजते हैं। सोचकर देखिए, यह आधुनिकता का कौन सा भयानक मुकाम है, जहाँ अपनों के जज़्बात, उनकी मुस्कान और उनके आंसुओं से ज्यादा कीमती हमारे लिए कुछ सेकंड के वीडियो पर मिलने वाले 'लाइक्स' और 'व्यूज' हो गए हैं।



(स्क्रीन की चकाचौंध में खोता अपनापन)

याद कीजिए वो दौर जब घरों में संवाद ही सबसे बड़ा मनोरंजन हुआ करता था। लोग एक-दूसरे की आँखों में देखकर बात करते थे, चेहरे के भाव पढ़कर समझ जाते थे कि अंदर क्या तूफान चल रहा है। आज? आज हम स्क्रीन के उस पार बैठे किसी अनजान अजनबी के रोने पर तो दिल (❤️) वाला इमोजी भेज देते हैं, लेकिन अपने ही घर में सुबक रही माँ की आँखों के कोने में जमी नमी हमें नजर नहीं आती।



कल शाम की ही तो बात है। एक बुजुर्ग पिता ने अपने युवा बेटे से कहा, "ेटा, थोड़ी देर फोन रख दे, ज़रा साथ बैठकर बात कर।" बेटे की उंगलियाँ स्क्रीन पर तेज़ी से चल रही थीं, बिना नजर उठाए उसने एक रील का लिंक पिता के व्हाट्सएप पर भेज दिया और बेरुखी से बोला, "पापा, यह वाला देखो, बहुत फनी है, बाद में बात करते हैं।"

उस बूढ़े बाप के दिल पर क्या गुजरी होगी? उस पिता ने, जिसने अपनी पूरी जवानी उस बेटे की उंगली थामकर उसे चलना सिखाने में बिता दी, आज बुढ़ापे में दो मिनट की तवज्जो के लिए एक वर्चुअल लिंक का मोहताज हो गया। क्या इसी दिन के लिए उसने अपने अरमानों का गला घोंटा था?

(फॉलोअर्स' की भीड़ और अपनों का अकेलापन)

आज हमारी प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। इंस्टाग्राम और फेसबुक के 'फॉलुअर्स' हमारी हकीकत बन चुके हैं। हम इस भ्रम में जी रहे हैं कि जितने ज्यादा लोग हमें स्क्रीन पर देख रहे हैं, हम उतने ही लोकप्रिय और खुश हैं। लेकिन यह डिजिटल लोकप्रियता एक छलावा है, एक ऐसा नशा है जो धीरे-धीरे हमें अपनों से काट रहा है।

हम वर्चुअल दुनिया में दूसरों को हँसाने और प्रभावित करने के चक्कर में अपने घर के अंदर के लोगों को रुला रहे हैं। एक पत्नी दिनभर रील्स बनाने की जुगत में लगी रहती है—कौन सा ट्रेंडिंग गाना चल रहा है, किस पर वीडियो बनानी है। पति अपने ऑफिस के तनाव से चूर होकर घर लौटता है, तो उसे सुकून का एक कंधा मिलने के बजाय कैमरे के सामने पोज देने को कहा जाता है। रिश्तों की ऊष्मा अब लाइक और कमेंट के काउंटर पर आकर दम तोड़ रही है।

( जब तक अहसास होगा, बहुत देर हो चुकी होगी  )

तकनीक दुश्मन नहीं है, दुश्मन हमारा अतिरेक है। मोबाइल ने दुनिया को छोटा किया है, लेकिन हमारे घरों के दिलों को बहुत दूर कर दिया है।

हम यह भूल रहे हैं कि जिंदगी कोई रील्स की फीड नहीं है, जिसे स्वाइप करके अगला पन्ना पलटा जा सके। जो लोग आज हमारे पास हैं, जो माँ-बाप हमारे लौटने का इंतजार करते हैं, जो जीवनसाथी हमारी एक मीठी मुस्कान को तरसता है—वे हमेशा के लिए यहाँ नहीं रहने वाले।

एक दिन ऐसा आएगा जब हमारे पास लाखों फॉलोअर्स होंगे, बैंक खाते में पैसे होंगे, मोबाइल की गैलरी हजारों वीडियो से भरी होगी, लेकिन जब हम मुड़कर देखेंगे तो घर का वह कमरा खाली मिलेगा। तब कोई हमें रील्स भेजने वाला नहीं होगा, कोई हमारी पोस्ट पर लाइक करने वाला नहीं होगा। बस पछतावे के सिवाय हाथ कुछ नहीं लगेगा।


आज इस लेख को पढ़ते-पढ़ते खुद से एक सवाल पूछिए—क्या वाकई हमने अपने अपونों को उस स्क्रीन के हवाले कर दिया है, जिसकी कोई रूह नहीं होती?

वक्त अभी भी पूरी तरह से नहीं फिसला है। आज ही, बल्कि इसी वक्त, अपने हाथ से उस फोन को नीचे रखिए। पास बैठे अपने पिता का हाथ थामिए, अपनी माँ के कंधे पर सिर रखकर पूछिए कि वे कैसे हैं, अपने बच्चों के साथ बिना फोन के दो पल खुलकर हँसिए


क्योंकि अंत में, न कोई रील साथ जाएगी, न कोई लाइक मायने रखेगा—सिर्फ और सिर्फ अपनों का साथ और उनके चेहरों की सच्ची मुस्कान ही हमारी असली पूंजी है। फोन को अपना मालिक मत बनने दीजिए, इसे सिर्फ एक उपकरण ही रहने दीजिए। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, अपनी इस खूबसूरत जिंदगी को रील्स के फ्रेम से बाहर निकालिए और अपनों को गले लगा लीजिए।


क्यों बढ़ रहा है युवाओं में आत्महत्या का अंधकार और कैसे बचाएं अपनी आने वाली पीढ़ी को?

 आज का युवा.....


उम्मीदों के बोझ और तन्हाई के साए में घुटता बचपन: क्यों बढ़ रहा है युवाओं में आत्महत्या का अंधकार और कैसे बचाएं अपनी आने वाली पीढ़ी को?


आज का दौर डिजिटल क्रांति, असीम संभावनाओं और रफ्तार का है, लेकिन इस चमक-धमक और बाहरी दिखावे के पीछे एक बेहद खौफनाक और गहरा अंधेरा भी पल रहा है—वह है हमारी युवा पीढ़ी में तेजी से बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति। आज का युवा, जो देश का भविष्य और समाज की रीढ़ है, वो डिप्रेशन, अकेलेपन, और क्षणिक असफलताओं के आगे इस कदर घुटने टेक रहा है कि वह जीवन के इस खूबसूरत सफर को बीच में ही छोड़कर हमेशा के लिए विदा हो रहा है। परीक्षा के प्राप्तांकों का दबाव, करियर की अंतहीन दौड़, एकतरफा या असफल प्रेम संबंध, सोशल मीडिया की वर्चुअल दुनिया में खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की अंधी होड़ और अपनों के बीच बढ़ती संवादहीनता—ये सब आज किसी हँसते-खेलते युवा के लिए इतना बड़ा बोझ बन जाते हैं कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आने लगती है। यह केवल किसी एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि हमारी पूरी पारिवारिक, सामाजिक और शिक्षा व्यवस्था की एक बहुत बड़ी असफलता है, जिस पर आज गंभीर मंथन और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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अगर इस भयावह समस्या की जड़ों में उतरकर देखा जाए, तो इसके पीछे कई ऐसे गहरे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक कारण छिपे हैं, जिनका जिक्र करना और समाधान ढूंढना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।

सबसे पहले बात करते हैं आज की इस नई पीढ़ी (Gen Z) के उस मानसिक तनाव की, जो वे हर पल अपने भीतर महसूस कर रहे हैं। आज का युवा एक ऐसे दौर में जी रहा है जहाँ 'तुलना की संस्कृति' चरम पर है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हर कोई अपनी जिंदगी का केवल एक खूबसूरत और झूठा हिस्सा ही दिखाता है—हँसते हुए चेहरे, महंगी गाड़ियाँ, शानदार पार्टियाँ और विदेश यात्राएं। एक सामान्य और संघर्षरत जीवन जी रहा युवा जब अपनी साधारण असलियत की तुलना दूसरों के इन 'फिल्टर्ड' और बनावटी जीवन से करता है, तो उसके मन में हीनभावना घर कर जाती है। उसे लगने लगता है कि वह अपने जीवन में असफल हो गया है, जबकि उसे यह अहसास ही नहीं होता कि सोशल मीडिया का वह संसार पूरी तरह छलावा है। इसके अलावा, आज के दौर में 'तात्कालिक संतुष्टि' (Instant Gratification) की आदत बहुत बढ़ गई है। युवाओं को हर चीज तुरंत चाहिए—पल भर में सफलता, रातों-रात दौलत और हर जगह लोकप्रियता। जब जीवन में धीमापन, संघर्ष या असफलता का सामना करना पड़ता है, तो उनका यह नाजुक मन उस दबाव को झेल नहीं पाता और बिखर जाता है।

इस पूरे संकट में एक और बड़ा और गंभीर पहलू जुड़ा हुआ है, और वह है घर-परिवार के भीतर का माहौल और माता-पिता की उम्मीदों का पहाड़। आज अनजाने में ही सही, लेकिन परिजन अपने बच्चों को सफलता की एक ऐसी मशीन बना देना चाहते हैं जहाँ भावनाओं के लिए कोई जगह नहीं होती। बचपन से ही बच्चे के कान में यह बात भर दी जाती है कि उसे डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस ही बनना है, और अगर उसके नंबर कम आए, तो उसका और उसके परिवार का भविष्य बर्बाद हो गया। शर्मा जी या वर्मा जी के बेटे से अपने बच्चे की हर रोज होने वाली तुलना बच्चे के अंदर ही अंदर घुटने पर मजबूर कर देती है। कई बार जब बच्चा परीक्षाओं में फेल हो जाता है या मनचाहा करियर नहीं चुन पाता, तो उसे लगता है कि अब वह अपने माता-पिता की नजरों में कभी नजर मिलाने लायक नहीं बचा। परिजनों का यह अति-अपेक्षात्मक रवैया और बच्चे के फेल होने पर उसे ताने देना या डांटना, उसे मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देता है। घर जो बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह होना चाहिए था, जब वही जगह जजमेंट और दबाव का अड्डा बन जाती है, तो युवा बाहर की दुनिया में रास्ता तलाशने लगता है जहाँ अक्सर उसे गलत संगत और गलत रास्ते ही मिलते हैं।

पारिवारिक पहलुओं के साथ-साथ आज की शिक्षा प्रणाली और आर्थिक अनिश्चितता भी युवाओं को मानसिक रूप से बीमार बना रही है। आज स्कूलों और कॉलेजों में केवलता किताबी रट्टा मारने और बड़ी डिग्रियां हासिल करने की अंधी दौड़ है। पाठ्यक्रम में जीवन के तनाव से लड़ना, मानसिक संतुलन बनाए रखना या असफलता के बाद दोबारा कैसे उठना है, इन बातों का कोई जिक्र नहीं होता। युवा जब अपनी पढ़ाई पूरी करके बाहर निकलता है, तो बेरोजगारी का भीषण संकट उसका स्वागत करता है। सालों की मेहनत के बाद भी जब नौकरी नहीं मिलती, परिवार और समाज ताने कसने लगते हैं, और आर्थिक तंगी घेर लेती है, तो युवा खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करने लगता है। उसे लगने लगता है कि उसके परिवार का उस पर जो पैसा खर्च हुआ है, वह उसका कर्ज नहीं चुका पा रहा है, और यही ग्लानि और निराशा उसे उस खौफनाक कदम की तरफ धकेल देती है।


इन सब कारणों के बीच एक और अनदेखा पहलू है—अकेलापन और संवादहीनता (Communication Gap)। आज के आधुनिक घरों में माँ, बाप और बच्चे एक ही छत के नीचे रहते हुए भी अलग-अलग मोबाइल स्क्रीन में खोए रहते हैं। किसी के पास किसी के लिए वक्त नहीं है। बच्चे के मन में क्या चल रहा है, वह अंदर से किस पीड़ा से गुजर रहा है, उसके दोस्त कौन हैं, या वह किसी बात से डरा हुआ है या नहीं—इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। जब युवा अपने दिल की बात अपने माता-पिता या भाई-बहन से साझा नहीं कर पाता, तो वह उस घुटन को अपने भीतर समेटे रहता है, जो धीरे-धीरे एक गंभीर डिप्रेशन या मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है।

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब हमें समाज के हर एक कोने से आगे आना होगा और सामूहिक प्रयास करने होंगे। सबसे पहले माता-पिता को अपनी सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाना होगा। आपको अपने बच्चों को केवल नंबरों या किसी डिग्री के तराजू में नहीं तौलना है। उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि वे अंकसूची से बहुत ऊपर हैं और आपकी जिंदगी के लिए अनमोल हैं। बच्चों को यह सिखाना बेहद जरूरी है कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने और संभलने का एक मौका है। अगर आपका बच्चा किसी परीक्षा में असफल हो जाता है या जीवन में पीछे रह जाता है, तो उस वक्त उसे डांटने या कोसने की बजाय उसे गले लगाने और उसका हाथ थामने की जरूरत होती है। घर का माहौल ऐसा होना चाहिए जहाँ बच्चा अपनी हर गलती, हर डर और हर असफलता को बिना किसी डर के खुलकर अपने माता-पिता के सामने रख सके।

इसके साथ ही, समाज और समुदाय के स्तर पर 'मानसिक स्वास्थ्य' (Mental Health) को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना होगा। हमारे समाज में आज भी अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन या एंग्जाइटी से जूझ रहा है और मनोचिकित्सक (Therapist) के पास जाता है, तो लोग उसे 'पागल' कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। इस सामाजिक कलंक को जड़ से उखाड़ना होगा। जैसे शरीर के किसी अंग में तकलीफ होने पर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही मन के बीमार होने पर काउंसलर की मदद लेना उतना ही सामान्य और जरूरी होना चाहिए।

युवा पीढ़ी को खुद भी यह समझना होगा कि जीवन बहुत बड़ा और खूबसूरत है, और वर्तमान की कोई भी मुसीबत या असफलता इतनी बड़ी नहीं है कि उसके लिए अपनी अनमोल सांसों को त्याग दिया जाए। आज अगर आप असफल हुए हैं, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कल आप सफल नहीं हो सकते। समय बदलता है, परिस्थितियां बदलती हैं, बस जरूरत है तो धैर्य रखने की और अपनों का साथ थामने की।

यह लड़ाई सिर्फ किसी एक परिवार या सरकार की नहीं है, बल्कि हम सबको मिलकर—समाज, परिवार, दोस्तों और हर एक जिम्मेदार नागरिक को—एकजुट होकर इस सोच के खिलाफ लड़ना होगा। हमें अपने आसपास के हर युवा पर नजर रखनी होगी, उसकी खामोशी को पढ़ना होगा और उसे यह अहसास कराना होगा कि वह इस दुनिया में अकेला नहीं है। आइए, आज यह पक्का संकल्प लें कि हम किसी भी युवा को निराशा के इस अंधेरे में अकेला नहीं डूबने देंगे, उसका हाथ थामेंगे, उसे सुनेंगे, और उसे बताएंगे कि उसकी एक-एक साँस इस पूरे समाज और देश के लिए सबसे ज्यादा कीमती है.......



Monday, July 27, 2026

नीट पेपर लीक और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के विरोध में बिलासपुर में निकली जन आक्रोश रैली

 नीट पेपर लीक और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के विरोध में बिलासपुर में निकली जन आक्रोश रैली

बिलासपुर –25 जुलाई 2026 को बिलासपुर में नीट पेपर लीक मामले के विरोध और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के प्रतिरोध में सैकड़ों युवाओं, विद्यार्थियों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा स्थानीय गांधी चौक से सिम्स चौक तक एक विशाल और अनुशासित जन आक्रोश रैली निकाली गई, जिसका आरंभ गांधी जी की प्रतिमा पर मालयार्पण के साथ हुआ तथा मार्ग में जूना बिलासपुर, सिटी कोतवाली,


 गोलबाजार और सदर बाजार से गुजरते हुए सिम्स चौक पर सामूहिक राष्ट्रगान के साथ इसका समापन किया गया। इस रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार की परीक्षा नीतियों के खिलाफ नारे लगाने के साथ एनटीए (NTA) को भंग करने,





 सोनम वांगचुक के संघर्ष का समर्थन करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश भर के छात्र आंदोलनों की बड़ी जीत करार दिया। इस विरोध प्रदर्शन में जेन जी के छात्र-छात्राओं, युवाओं के साथ-साथ शहर के अनेक बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिनमें प्रियंका शुक्ला अधिवक्ता, कुणाल रामटेके, नन्द कश्यप, प्रथमेश मिश्रा, प्रशांत ठाकुर, शशांक देवांगन, सूर्या शर्मा, अकरम, राजिक अली, सूरज साहू, लोकेश उइके, पूजा उइके, रजनीश श्रीवास्तव, आदर्श, प्रज्ञा मेश्राम, विवेक यादव, परदेसी रात्रे, छोटू ध्रुव, जैरी हेनरी, खालिद खान, सज्जू खान, जसबीर सिंह चावला, असीम तिवारी और कमलेश लौहरात्रे समेत ढेरों लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार होने तक समय-समय पर आंदोलन जारी रखने की सहमति जताते हुए अगले दिन रायपुर जाने की भी जानकारी दी।


Wednesday, July 22, 2026

बिलासपुर के NEET सफल छात्रों ने मनाया जश्न, री-नीट की चुनौतियों से पार पाकर दी प्रेरणादायक सीख

 NEET SUCCESS


बिलासपुर : NEET परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करने वाले बिलासपुर के छात्र-छात्राओं ने अपनी कामयाबी का जश्न मनाया। इस दौरान सफल विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और लगातार मिली प्रेरणा को दिया। छात्रों ने री-नीट जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का जिक्र करते





 हुए कहा कि कठिन समय में परिवार और शिक्षकों का साथ ही उन्हें दोबारा खड़े होने की ताकत देता है। साथ ही उन्होंने छात्रों से किसी भी परिस्थिति में गलत कदम न उठाने और खुलकर अपने परिजनों व शिक्षकों से बात करने की अपील भी की। बिलासपुर में NEET परीक्षा में सफल हुए छात्र-छात्राओं का सम्मान और जश्न का माहौल देखने को मिला। 




सफल विद्यार्थियों ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, शिक्षकों और हर उस व्यक्ति की है जिसने मुश्किल समय में उनका साथ दिया। छात्रों ने बताया कि री-नीट की घोषणा के बाद वे भी निराश हुए थे, लेकिन परिवार और शिक्षकों के हौसले ने उन्हें फिर से मेहनत करने के



 लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र लगातार अभ्यास, टेस्ट सीरीज और प्रश्नपत्रों का विश्लेषण है। एक अन्य सफल छात्र उत्कर्ष राठौर ने बताया कि री-नीट ने उन्हें अपनी पिछली रैंक सुधारने का एक नया अवसर दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों का योगदान शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। वहीं अन्य विद्यार्थियों ने भी अनअकैडमी बिलासपुर सेंटर के शिक्षकों का आभार जताते हुए कहा कि हर परिस्थिति में उन्हें केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने की सीख मिली। छात्रों ने उन अभ्यर्थियों से भी अपील की जो असफलता से निराश हैं कि आत्महत्या कभी समाधान नहीं है, बल्कि अपने परिवार और शिक्षकों से बात कर आगे बढ़ना ही सही रास्ता है। NEET में सफलता हासिल करने वाले इन छात्रों की कहानी बताती है कि मेहनत, सही मार्गदर्शन और परिवार का भरोसा किसी भी मुश्किल को सफलता में बदल सकता है। छात्रों की यह उपलब्धि अब दूसरे अभ्यर्थियों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

ऐतिहासिक नगरी मल्हार में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा का हुआ शुभारंभ, क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति

ऐतिहासिक नगरी मल्हार में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की नई शाखा का हुआ शुभारंभ, क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति

बिलासपुर :–बिलासपुर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल मल्हार में आज 22 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की 629वीं और जिले की 37वीं नवीन शाखा का भव्य शुभारंभ किया गया। बैंक के माननीय अध्यक्ष  विनोद कुमार अरोरा के कर-कमलों द्वारा उद्घाटित इस समारोह में क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश कुमार सिंह राजपूत, कॉर्पोरेट ऑफिस से श्रीनिवासन , वरिष्ठ प्रबंधक परिचालन दिनेश कुमार चौहान, सामान्य बैंकिंग प्रभारी राहुल कुमार शर्मा, शाखा प्रबंधक


 धीरज कुमार, कार्यालय सहायक यश गुप्ता सहित स्थानीय गणमान्य नागरिक शेष नारायण गुप्ता, अवधेश कुमार, नरेन्द्र








 कुमार (संचालक, लक्ष्मी वस्त्रालय), सत्य राय और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अध्यक्ष महोदय ने बैंक के विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी और विश्वास जताया कि यह शाखा क्षेत्र के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी, साथ ही उन्होंने उपस्थितजनों को जागरूक करते हुए साइबर सुरक्षा से बचने के महत्वपूर्ण उपाय भी साझा किए........


Monday, July 13, 2026

सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग का कारनामा– विभागीय निर्देशों की अनदेखी कर शिक्षकों को बनाया जा रहा अधीक्षक

 सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग का कारनामा– विभागीय निर्देशों की अनदेखी कर शिक्षकों को बनाया जा रहा अधीक्षक


​सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बिलासपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शिक्षकों को उनके मूल शिक्षण कार्य से मुक्त नहीं किया गया है। विभाग की ओर से प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए बड़ी संख्या में शिक्षकों को छात्रावासों के प्रभारी अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार थमाया जा रहा है। जिले में कुल 84 छात्रावासों के सापेक्ष 60 से अधिक नियमित अधीक्षक कार्यरत हैं, इसके बावजूद बिल्हा, तखतपुर, चपोरा, कुरवार, शिवतराई, जारहाभाटा, बोड़सरा और मस्तूरी जैसे विकासखंडों में नियमित अधीक्षकों की मौजूदगी के बावजूद शिक्षकों को प्रभारी अधीक्षक के रूप में तैनात रखा गया है।



 बिल्हा और तखतपुर जैसे क्षेत्रों में तो एक ही शिक्षक को दो-दो छात्रावासों का प्रभार दिया गया है, जबकि वहाँ पहले से ही नियमित अधीक्षक मौजूद हैं। जारहाभाटा कैंपस में तीन नियमित अधीक्षकों की उपलब्धता के बाद भी प्रभारी व्यवस्था बनाए रखना विभाग की मनमानी और प्रशासनिक अव्यवस्था को उजागर करता है। सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा नियमित अधीक्षकों को दरकिनार कर शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देने का यह विकल्प विभागीय कार्य संस्कृति और शिक्षकों के मूल कर्तव्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है.......

Sunday, July 12, 2026

शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बरसे राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, रविंद्र सिंह के साथ की संगठनात्मक चर्चा

बिलासपुर आगमन पर राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का जिला शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने सौजन्य भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया और इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आगामी संगठनात्मक गतिविधियों व रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद, शहर में आयोजित ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम में सम्मिलित हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने मंच से केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान अव्यवस्था के चलते शिक्षा विभाग पूरी तरह से आईसीयू में वेंटिलेटर पर है। उन्होंने देश भर में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को छात्रों के

 भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया और हाल ही में 21 छात्रों द्वारा की गई आत्महत्या की घटनाओं को सिस्टम की विफलता का काला अध्याय बताया। प्रतापगढ़ी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों की यह शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और वे इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद तक पुरजोर तरीके से उठाएंगे।


 उन्होंने बिलासपुर के छात्र-छात्राओं के साथ हुए संवाद से निकले निष्कर्षों को सदन में रखने का भरोसा दिलाया और मांग की कि जब तक जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक कांग्रेस पार्टी छात्र हित में अपनी संघर्ष यात्रा जारी रखेगी।

Friday, July 10, 2026

होली क्रॉस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लालखदान में विद्यार्थी परिषद का भव्य गठन समारोह हुआ संपन्न ।


बिलासपुर –होली क्रॉस सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लालखदान में विद्यार्थी परिषद गठन समारोह का आयोजन अत्यंत उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर भारत माता हिंदी मीडियम स्कूल के प्राचार्य फॉदर प्रमोद बारा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एवं विशिष्ठ अतिथि रहे ग्रेंड न्यूज के संवाददाता श्री पुरुषोत्तम दुबे थे विद्यालय परिवार ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया।कार्यक्रम में नवगठित विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से अवगत कराया गया तथा विद्यालय एवं समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, नेतृत्व और सेवा-भाव से कार्य करने की शपथ दिलाई गई।

समारोह को विद्यार्थियों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने और भी आकर्षक बना दिया। रंगारंग संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।मुख्य अतिथियो ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद विद्यालय के अनुशासन एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है।


विद्यालय के प्राचार्या डॉ सिस्टर क्लेरिटा डिमैलो ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए आशा व्यक्त की कि वे विद्यालय की गरिमा को बनाए रखते हुए अपने उत्तरदायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन करेंगे।


कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय के शिक्षकों द्वारा किया गया ।

Sunday, June 21, 2026

योग ही स्वस्थ और संतुलित जीवन का आधार_रविंद्र सिंह

बिलासपुर –अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व सदस्य रविंद्र सिंह ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग आज हम सभी के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है, जो न केवल शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचय कर हमारी दिनचर्या को व्यवस्थित करने का भी सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक स्वस्थ जीवन और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए योग के जरिए तन और मन को शुद्ध व मजबूत बनाना अनिवार्य है, विशेषकर प्रतिस्पर्धा के इस आधुनिक दौर में, जहाँ शारीरिक और मानसिक स्थिति को सुदृढ़ रखना अत्यंत आवश्यक हो गया है। श्री सिंह ने योग को रोगों से मुक्ति का



 एकमात्र साधन बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया और सुझाव दिया कि योग को स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, मंदिरों और धर्मशालाओं जैसे हर क्षेत्र में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि प्रदेश और देश में एक स्वस्थ समाज की स्थापना हो सके। उन्होंने विशेष रूप से नई पीढ़ी के भविष्य पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की अव्यवस्थित जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतों, भागदौड़ और तनाव भरे माहौल में बच्चों को नशा व मानसिक दबाव से बचाने के लिए उन्हें नियमित रूप से योग से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि योग ही वह माध्यम है जिससे हम एक संतुलित और अनुशासित जीवन यापन कर सकते हैं......

Wednesday, June 10, 2026

छात्रावास अधीक्षक संघ ने बढ़ाई मांग: महंगाई के दौर में शिष्यवृत्ति और अनुरक्षण मद में अविलंब वृद्धि की आवश्यकता

बिलासपुर–(10 जून 2026)छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ (जिला इकाई, बिलासपुर) ने आज मुख्यमंत्री महोदय के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए छात्रावासों की बदहाल स्थिति और विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संघ ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 से अब तक विद्यार्थियों की शिष्यवृत्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि इस बीच खाद्य सामग्री, दूध, सब्जी, फल और रसोई गैस जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस बढ़ती महंगाई के कारण वर्तमान में निर्धारित राशि में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और संतुलित भोजन उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिससे उनके पोषण स्तर पर विपरीत प्रभाव पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अतिरिक्त, संघ ने 'अनुरक्षण मद'


 (Maintenance Fund) की अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए बताया कि अधिकांश छात्रावासों को मरम्मत, स्वच्छता, पेयजल और विद्युत व्यवस्था के लिए समय पर फंड नहीं मिल पा रहा है। इन आवश्यक सुविधाओं के अभाव में अधीक्षक सीमित संसाधनों के साथ छात्रावास का संचालन करने को मजबूर हैं, जिससे बुनियादी ढांचा लगातार कमजोर होता जा रहा है। अपनी मांगों को प्रमुखता से रखते हुए संघ ने शासन से आग्रह किया है कि विद्यार्थियों के व्यापक हित में शिष्यवृत्ति की राशि में तत्काल यथोचित वृद्धि की जाए और अनुरक्षण मद को नियमित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को एक बेहतर आवासीय और शैक्षणिक वातावरण मिल सके। इस ज्ञापन सौंपने के दौरान बिलासपुर छात्रावास अधीक्षक संघ के जिला अध्यक्ष श्री विकास तिवारी सहित उपाध्यक्ष पामेन्द्र कुर्रे, प्रफुल्ल शर्मा, देवेंद्र पाण्डेय, आलोक शर्मा, राहुल साहू, एल महेश्वर राव, प्रकाश शर्मा, शुखदेव सोनी एवं जिले के समस्त छात्रावास अधीक्षक उपस्थित रहे।


Saturday, May 23, 2026

ऑल इंडिया इंडोर आर्चरी ओपन टूर्नामेंट के लिए गोवा रवाना हुए नीतीश रत्नेश, राष्ट्रीय मंच पर अकेले करेंगे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व

ऑल इंडिया इंडोर आर्चरी ओपन टूर्नामेंट के लिए गोवा रवाना हुए नीतीश रत्नेश, राष्ट्रीय मंच पर अकेले करेंगे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व

बिलासपुर – बिलासपुर स्थित होली क्रॉस स्कूल, लाल खदान के होनहार और बेहद प्रतिभाशाली छात्र नीतीश रत्नेश 1st ऑल इंडिया इंडोर आर्चरी ओपन टूर्नामेंट 2026 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से गोवा के लिए रवाना हो गए हैं, जिससे पूरे प्रदेश और खेल जगत में हर्ष का माहौल है। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सबसे खास और गौरव की बात यह है कि नीतीश रत्नेश छत्तीसगढ़ राज्य से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और खेल के प्रति बेजोड़ समर्पण के दम पर इस मुकाम को हासिल किया है। नीतीश की यह असाधारण उपलब्धि न



 केवल बिलासपुर और उनके स्कूल परिवार के लिए सम्मान की बात है, बल्कि क्षेत्र के अन्य उभरते युवाओं और खिलाड़ियों के लिए भी एक महान प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। अपनी लगन और अनुशासन से यह साबित करने वाले नीतीश की इस सफलता पर स्कूल प्रबंधन, शिक्षकगण, खेल प्रेमियों और समस्त क्षेत्रवासियों ने गहरा गर्व व्यक्त किया है; अब सभी की दुआएं और शुभकामनाएं नीतीश के साथ हैं कि वे इस राष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर बिलासपुर और पूरे छत्तीसगढ़ का नाम देशभर में रोशन करेंगे.....


Monday, May 4, 2026

Bharat Mata English Medium School Achieves 100% Result in Class 5th and 8th Board exams

 Bharat Mata English Medium School Achieves 100% Result in Class 5th and 8th Board exams 


BILASPUR Bharat Mata English Medium School has recorded an outstanding performance in the Class 5th and 8th board examinations for the academic session 2025-26, achieving a perfect 100% pass rate. Demonstrating exceptional academic excellence, every single student from both



 grades passed the examinations in the first division, with a majority of them scoring above the 90% mark. A stellar performance was delivered by Navya Prajapati of Class 5th, who secured the top position in the school with an incredible 99% score. 


On this momentous occasion, School Principal Father Salin P., along with the school management and the teaching faculty, extended their heartfelt congratulations to the students for their hard work and wished them continued success in their future academic endeavors.........

(भारत माता आंग्ल माध्यम शाला का दबदबा: 5वीं और 8वीं के बोर्ड नतीजों में शत-प्रतिशत छात्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण

​बिलासपुर स्थित भारत माता आंग्ल माध्यम शाला ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के बोर्ड परीक्षाओं में सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शाला की कक्षा पांचवीं और आठवीं का परीक्षा परिणाम इस वर्ष शत-प्रतिशत रहा, जहाँ न केवल सभी छात्र-छात्राओं ने प्रथम श्रेणी में सफलता प्राप्त की, बल्कि अधिकांश विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। विशेष रूप से



कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्या प्रजापति ने 99% अंकों के साथ स्कूल में टॉप कर संस्थान का गौरव बढ़ाया है। छात्र-छात्राओं की इस शानदार उपलब्धि और कड़ी मेहनत को देखते हुए शाला के प्राचार्य फादर सलीन पी, शाला प्रबंधन समिति और समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपनी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की हैं...........)




प्रवेश प्रारम्भ:–






Saturday, April 25, 2026

हॉली क्रॉस स्कूल लालखदान मे विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर भव्य वृक्षारोपण का किया गया आयोजन

 बिलासपुर – लालखदान स्थित  हॉली क्रॉस सीनियर सेकेंडरी स्कूल,में 'विश्व पृथ्वी दिवस' के उपलक्ष्य में प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु 'गो ग्रीन' थीम के तहत एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.... खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल पौधे ही नहीं लगाए, बल्कि नन्हें हाथों से रोपी गई इस हरियाली की उम्मीद को निरंतर सींचने, उसकी देखभाल और संरक्षण करने का अटूट संकल्प भी लिया। इस अवसर पर शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों को ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों से अवगत कराते हुए वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डाला।  क्रॉस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 'विश्व पृथ्वी दिवस' के उपलक्ष्य में एक भव्य वृक्षारोपण उत्सव का आयोजन किया गया। 'गो ग्रीन' थीम पर आधारित इस


गरिमामयी कार्यक्रम में विद्यालय के नन्हें विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं ने अपार उत्साह दिखाते हुए प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। विद्यालय परिसर में आयोजित इस हरित अभियान के दौरान वातावरण मिट्टी की सौंधी खुशबू और 'पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ' के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। रंग-बिरंगे पोस्टरों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए छात्र-छात्राओं ने मिलकर विभिन्न प्रजातियों के छायादार

 
और फलदार वृक्ष लगाए, इसके अलावा नन्हें हाथों से रोपी गई इस हरियाली की उम्मीद को निरंतर सींचने, उसकी देखभाल और संरक्षण करने का अटूट संकल्प भी लिया। इस अवसर पर शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों को ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों से अवगत कराते हुए वृक्षों के महत्व पर प्रकाश डाला। 












 उन्होंने बताया कि वृक्ष न केवल हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि वे हमारे संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के रक्षक भी हैं। स्कूल प्रशासन के इस सार्थक और सराहनीय प्रयास ने न केवल विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाई, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित किया। यह आयोजन समाज के लिए एक सशक्त संदेश था कि यदि हमें अपना भविष्य सुरक्षित रखना है, तो आज प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य है...



प्रवेश प्रारम्भ :------


Tuesday, April 14, 2026

बिलासपुर जिला शहर कांग्रेस कमेटी व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के द्वारा प्रत्येक वार्ड में चलाया जा रहा संगठन सृजन अभियान

 बिलासपुर जिला शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह जी ने कहा संगठन सृजन अभियान आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी के लिए मिल का पत्थर साबित होगा । वार्ड से लेकर शहर जिला प्रदेश व देश के विभिन्न कोनों में कार्यकर्ताओं के बीच जाकर संगठन को मजबूती प्रदान करने का काम निश्चित ही सराहनी है।आने वाले समय में व आगामी चुनाव में हमें इसका सुखद परिणाम परिलक्षित होगा।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर बिलासपुर जिला शहर कांग्रेस कमेटी व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के द्वारा प्रत्येक वार्ड में संगठन सृजन अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विनोबा नगर वार्ड नंबर 27 का संगठन सृजन अभियान बैठक आहूत की गई थी। जिसमें प्रमुख रूप से बिलासपुर नगर निगम के पूर्व महापौर रामशरण यादव छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी संयुक्त महामंत्री व पर्यवेक्षक पंकज सिंह ब्लॉक अध्यक्ष संतोष गर्ग प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव शिवा मिश्रा व बिलासपुर नगर निगम के पूर्व नेता


 प्रतिपक्ष व पार्षद रविंद्र सिंह ठाकुर शहर उपाध्यक्ष शिवा मुदलियार चंद्रहास शर्मा शहर महामंत्री प्रशांत पांडेय संगीत मोईत्रा हेरि डेनियल संजय दवे संजीव परिहार राहुल दुबे विजय तिवारी राम प्रकाश केशरवानी योगेश पिल्ले कल्पना शेन्डे गुड्डू चंदेल संदीप मिश्रा गुलशन सिंह राजेश साहू छोटू बर्थडे गुड्डू पाठक केशव गोरख अदिति वर्मा राकेश केसरी हनु शर्मा अजय गोस्वामी उदय गंगवानी जावेद खान ऋषि पटेल यश सिंह पप्पू विष्ट आदि उपस्थित थे.................




प्रवेश प्रारम्भ तो जल्दी करियें......बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए.......






जिस्म में लोहे सा दम या पैकेटबंद मौत का जहर

  शीर्षक:–जिस्म में लोहे सा दम या पैकेटबंद मौत का जहर जहाँ आज हमारी आधुनिक और रफ्तार भरी जिंदगी ने हमें सुपरमार्केट की चमकीली पन्नी और फ्रिज...