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Friday, August 7, 2026

सड़क पर गड्ढे, नाली की समस्या और अंधेरा… वार्ड के लोग बोले- कब बदलेगी तस्वीर?

 सड़क पर गड्ढे, नाली की समस्या और अंधेरा… वार्ड के लोग बोले- कब बदलेगी तस्वीर?


बिलासपुर। शहर के कई इलाकों में मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार सामने आ रही हैं। कहीं सड़क पर बने गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं, तो कहीं नाली और सफाई व्यवस्था की कमी से रहवासी परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।


बारिश में बढ़ जाती है परेशानी


रहवासियों के मुताबिक बारिश के दिनों में खराब सड़क और जल निकासी की समस्या सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है। कई जगह पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को ज्यादा परेशानी होती है।


लोगों ने उठाई आवाज


स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र के विकास और सुविधाओं को लेकर कई बार जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों ने मांग की है कि सड़क मरम्मत, नाली सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर जल्द ध्यान दिया जाए।


जिम्मेदारों से उम्मीद


लोगों का कहना है कि शहर के विकास के लिए जरूरी है कि जमीनी स्तर की समस्याओं का समय पर समाधान हो। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी जल्दी दूर करता है।



चुनाव को महीनों बीते, न नाली बनी और न हटा अतिक्रमण, आखिर निशाने पर सिर्फ एक स्कूल क्यों?

 


चुनाव को महीनों बीते, न नाली बनी और न हटा अतिक्रमण, आखिर निशाने पर सिर्फ एक स्कूल क्यों?

बिलासपुर –पंचायत चुनाव संपन्न हुए भी काफी समय बीत चुका है, लेकिन लालखदान चौकसे कॉलेज रोड की सबसे बड़ी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। न तो पूरे नाले का निर्माण हो सका और न ही वर्षों से नाले के ऊपर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की कोई प्रभावी पहल दिखाई दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल हॉली क्रॉस स्कूल के सामने तक सीमित दिखाई दे रही है, जबकि उसी मार्ग पर कई स्थानों पर नाले के ऊपर सड़कें, मकान और अन्य निर्माण आज भी मौजूद हैं। इससे यह सवाल उठना


 स्वाभाविक है कि आखिर कार्रवाई का दायरा सिर्फ एक ही स्थान तक क्यों सीमित रखा गया। फिलहाल हम किसी जनप्रतिनिधि का नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति इसी तरह बनी रही और जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बचते रहे तो स्थानीय लोगों द्वारा उठाए जा रहे सवालों और तथ्यों के आधार पर संबंधित जनप्रतिनिधियों की भूमिका तथा पूरे




 मामले की परतें भी सार्वजनिक की जाएंगी। जनता का कहना है कि शिक्षा के मंदिर को असुविधा में डालने के बजाय पूरे क्षेत्र की समस्या का समान रूप से समाधान होना चाहिए। यदि कहीं अतिक्रमण है तो उस पर भी एक जैसी कार्रवाई हो, अन्यथा चयनात्मक कार्रवाई जनप्रतिनिधियों की मंशा पर सवाल खड़े करती रहेगी।

Wednesday, August 5, 2026

सड़क सुरक्षा नियम और हमारी जिम्मेदारी

 ​शीर्षक: सड़क सुरक्षा नियम और हमारी जिम्मेदारी


सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। वाहन चलाते समय हेलमेट या सीट बेल्ट का उपयोग करना, तय गति सीमा में गाड़ी चलाना और नशे की हालत में वाहन न चलाना जीवन की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी और समझदारी हमारे और हमारे परिवार की जान बचा सकती है।

सावन उत्सव में झलकी संस्कृति, हुनर और महिला सशक्तिकरण की मिसाल, घरेलू उद्यमियों को मिला सम्मान

 



बिलासपुर में हर नारी रोजगार फाउंडेशन, लायंस क्लब बिलासपुर और शक्ति क्लब के संयुक्त तत्वावधान में होटल इंटरसिटी, जगमल चौक में भव्य सावन उत्सव का आयोजन उत्साह और पारंपरिक रंगों के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा नेत्री किरण सिंह तथा विशिष्ट अतिथि जीएमटी कोऑर्डिनेटर लायन चंदा बंसल और जीएलटी कोऑर्डिनेटर लायन फरहीन चिश्ती द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। अतिथियों ने महिलाओं को



 समाजसेवा, आत्मनिर्भरता और संगठन से जुड़कर आगे बढ़ने का संदेश देते हुए घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करने की पहल की सराहना की। कार्यक्रम में सावन की थीम पर मेहंदी, हेयर स्टाइल, टैलेंट हंट, सावन सुंदरी सहित कई आकर्षक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें शिवांगी दीप सोनी ने सावन सुंदरी का खिताब जीता, जबकि मेहंदी, हेयर स्टाइल और टैलेंट हंट के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

 


साथ ही विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। शक्ति क्लब की ओर से उपस्थित सभी महिलाओं को कपड़े के थैले वितरित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम की एक विशेष


 आकर्षण घरेलू उद्योग चलाने वाली महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल रहे, जहां उनके उत्पादों को भरपूर सराहना मिली। आयोजन को सफल बनाने में होटल इंटरसिटी के हरदीप सिंह सलूजा, अरविंद वर्मा, मधु शर्मा और रोशनी दीक्षित सहित सभी आयोजकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरे आयोजन में पारंपरिक संस्कृति, महिला प्रतिभा, स्वरोजगार और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम देखने को मिला।

दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला को ऑटो में बैठाकर नशीला पदार्थ पिलाया. फिर जेवर लेकर फरार हुए बदमाश....



बिलासपुर शहर में बदमाशों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक और सनसनीखेज मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र से सामने आया है। बृहस्पति बाजार में सब्जी खरीदने गई बुजुर्ग महिला विद्या मोटवानी को दो शातिर बदमाशों ने बड़ी ही चालाकी से अपना निशाना बनाया। पहले रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू की, फिर भरोसे में लेकर उन्हें जबरन ऑटो में बैठाया और नेहरू चौक की ओर ले गए। आरोप है कि रास्ते में महिला को कोई नशीला पदार्थ पिला दिया गया, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई और उनकी सुध-बुध पूरी तरह खत्म हो गई। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने महिला के हाथों से सोने की अंगूठी, चूड़ियां समेत कीमती जेवर उतरवा लिए और उन्हें बेसहारा छोड़कर फरार हो गए। कुछ देर बाद होश आने पर महिला किसी तरह अपने घर पहुंची और पूरी घटना परिजनों को बताई, जिसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया। पीड़ित परिवार तत्काल सिविल लाइन थाना पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का कहना है कि बदमाश बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देकर फरार हुए हैं। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, वहीं ऑटो और आरोपियों की पहचान के लिए पुलिस अलग-अलग बिंदुओं पर जांच कर रही है। दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला को निशाना बनाकर अंजाम दी गई इस वारदात ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इन शातिर आरोपियों तक कब पहुंचती है और पीड़िता को न्याय कब मिलता है।

 


Monday, August 3, 2026

कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......



रेल सुरक्षा में नई क्रांति का 'कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......


बिलासपुर :–भारतीय रेलवे अब सुरक्षा के उस नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर अत्याधुनिक तकनीक के जरिए प्रभावी रोक लगाई जाएगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अपने पूरे 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। रेलवे संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है, आधुनिक संचार टावर स्थापित किए जा रहे हैं और लोकोमोटिवों में कवच उपकरण फिट किए जा रहे हैं। अब तक 238 इंजनों में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। यह परियोजना केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के सुरक्षा इतिहास में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जिससे लाखों यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक होगा।



बिलासपुर मंडल में बिलासपुर–रायगढ़ रेलखंड पर कवच की कमीशनिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि बिलासपुर–चांपा रेलखंड में फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। नागपुर मंडल के नागपुर–दुर्ग रेलखंड पर एसआईएल-4 स्तर की कमीशनिंग के लिए साइट परीक्षण और लोको ट्रायल जारी हैं। इसी क्रम में 23 जुलाई को कलमना–सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड पर ब्रेकिंग मोड ऑन के साथ एसआईएल-4 स्तर का कवच ट्रायल पूरी तरह सफल रहा। इस परीक्षण के दौरान सिग्नल रिस्पॉन्स, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण और आपातकालीन एसओएस प्रणाली की कार्यक्षमता को परखा गया, जिसमें सभी परीक्षण सफल रहे। वहीं रायपुर मंडल के दुर्ग–मांढर रेलखंड पर भी परियोजना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रही है।


'कवच' भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित विश्वस्तरीय एसआईएल-4 प्रमाणित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह तकनीक लोको पायलट को वास्तविक समय में सिग्नल की स्थिति, अधिकतम अनुमत गति, लक्ष्य दूरी और मूवमेंट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराती है। यदि चालक किसी कारणवश निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करता या खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति बनती है, तो कवच बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित रोक देता है। यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे की सबसे भरोसेमंद और भविष्य की सुरक्षा तकनीकों में शामिल किया जा रहा है।



इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सिग्नल उल्लंघन ही नहीं रोकती, बल्कि आमने-सामने, पीछे से या साइड से होने वाली संभावित ट्रेन टक्कर को भी रोकने में सक्षम है। घने कोहरे या कम दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी यह सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करती है। खतरे वाले सिग्नल को पार करने से पहले ट्रेन को स्वतः रोकना, निर्धारित गति सीमा से अधिक होने पर स्वचालित ब्रेक लगाना, स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन कराना, लेवल क्रॉसिंग के निकट स्वतः हॉर्न बजाना और किसी आपात स्थिति में स्टॉप ऑन साइट (एसओएस) संदेश प्रसारित कर आसपास की ट्रेनों को स्वतः नियंत्रित करना इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। इससे रेल परिचालन न केवल अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि समयबद्धता और संचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा.....


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में चरणबद्ध तरीके से 'कवच' के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर तकनीक के बल पर सुरक्षा का नया अध्याय लिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जब पूरा 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क इस अत्याधुनिक प्रणाली से जुड़ जाएगा, तब रेल दुर्घटनाओं की आशंका में भारी कमी आएगी और यात्रियों का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह सुरक्षा कवच केवल रेलवे की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य की मजबूत पहचान बनकर उभर रहा है...........





Saturday, August 1, 2026

विरासत, संस्कृति और विकास की अनोखी गाथा


 बिलासपुर का इतिहास: विरासत, संस्कृति और विकास की अनोखी गाथा


छत्तीसगढ़ की न्यायधानी के रूप में पहचान बना चुका बिलासपुर केवल एक आधुनिक शहर नहीं, बल्कि सदियों पुरानी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी है। अरपा नदी के शांत तट पर बसा यह शहर आज न्यायपालिका, रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार का प्रमुख केंद्र है। लेकिन बिलासपुर की पहचान केवल वर्तमान विकास तक सीमित नहीं है। इसका इतिहास हमें उन दिनों में ले जाता है, जब यह क्षेत्र दक्षिण कोसल की सांस्कृतिक परंपराओं, कलचुरी शासकों की राजधानी और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था।


आज देशभर में बिलासपुर को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्यालय के रूप में जाना जाता है। वहीं स्थानीय लोककथाओं में यह शहर वीरांगना बिलासा केंवटीन के साहस और संघर्ष की याद दिलाता है। यही कारण है कि इतिहास, संस्कृति और आधुनिक विकास का अनूठा संगम बिलासपुर

को छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में स्थान दिलाता है।


बिलासपुर नाम की उत्पत्ति


बिलासपुर के नाम को लेकर कई मान्यताएँ प्रचलित हैं, लेकिन सबसे प्रसिद्ध मान्यता वीरांगना बिलासा केंवटीन से जुड़ी है। लोककथाओं के अनुसार बिलासा एक साहसी, निडर और समाजसेवी महिला थीं, जिन्होंने अपने साहस और नेतृत्व से लोगों का विश्वास जीता। उनके सम्मान में इस क्षेत्र का नाम "बिलासपुर" पड़ा।



आज भी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, गीतों और कथाओं में बिलासा केंवटीन का विशेष स्थान है। राज्य सरकार भी उनके सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिलासपुर का इतिहास केवल इमारतों और राजाओं का नहीं, बल्कि जननायकों और लोकपरंपराओं का भी इतिहास है।


प्राचीन काल का बिलासपुर


प्राचीन समय में बिलासपुर का क्षेत्र दक्षिण कोसल का हिस्सा माना जाता था। यह क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध था। आसपास के रतनपुर, मल्हार और सिरपुर जैसे नगर उस समय शिक्षा, धर्म और कला के प्रमुख केंद्र थे।


विशेष रूप से मल्हार का ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। यहाँ हुई पुरातात्विक खुदाइयों में कई प्राचीन मंदिर, मूर्तियाँ, सिक्के और शिलालेख मिले हैं, जो बताते हैं कि यह क्षेत्र हजारों वर्षों से सभ्यता का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।


इतिहासकारों के अनुसार इस क्षेत्र में बौद्ध, जैन और सनातन धर्म की परंपराएँ साथ-साथ विकसित हुईं। यही विविधता आज भी बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान में दिखाई देती है।


कलचुरी शासन और रतनपुर का गौरव


बिलासपुर के इतिहास में कलचुरी वंश का विशेष महत्व है। लगभग 10वीं शताब्दी से रतनपुर कलचुरी राजाओं की राजधानी बना। उस समय पूरा क्षेत्र प्रशासन, व्यापार और संस्कृति का प्रमुख केंद्र था।


कलचुरी शासकों ने अनेक मंदिरों, तालाबों और धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया। आज भी रतनपुर का महामाया मंदिर, प्राचीन किले के अवशेष और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें उस गौरवशाली काल की याद दिलाती हैं।


उस समय कृषि और व्यापार दोनों तेजी से विकसित हुए। आसपास के गाँवों से अनाज, वन उत्पाद और हस्तशिल्प रतनपुर के बाजारों तक पहुँचते थे। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।


अरपा नदी का महत्व


बिलासपुर का विकास अरपा नदी के बिना अधूरा है। यह नदी केवल पानी का स्रोत नहीं रही, बल्कि शहर की संस्कृति, कृषि और व्यापार की आधारशिला भी बनी।


नदी के किनारे बसे गाँवों में खेती तेजी से विकसित हुई। लोगों को पीने का पानी, सिंचाई और आवागमन की सुविधा मिली। धीरे-धीरे नदी के आसपास बस्तियाँ विकसित हुईं, जो आगे चलकर आधुनिक बिलासपुर शहर का हिस्सा बन गईं।


आज भी अरपा नदी को बिलासपुर की जीवनरेखा कहा जाता है। हालांकि बढ़ते शहरीकरण के कारण इसके संरक्षण की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।


मराठा शासन का दौर


18वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर मराठाओं का प्रभाव बढ़ा। मराठा शासन के दौरान राजस्व व्यवस्था में कई बदलाव किए गए। व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला और प्रशासनिक व्यवस्था को संगठित किया गया।


इसी काल में बिलासपुर का महत्व धीरे-धीरे बढ़ने लगा। आसपास के क्षेत्रों से व्यापारी यहाँ आने लगे और स्थानीय बाजारों का विस्तार हुआ। कृषि उत्पादों के साथ-साथ वन संपदा का व्यापार भी बढ़ा।


मराठा काल ने बिलासपुर को एक उभरते हुए व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचान दिलाई, जिसने आगे चलकर आधुनिक शहर बनने की नींव रखी।


अंग्रेजी शासन और आधुनिक प्रशासन की शुरुआत


1818 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध के बाद यह क्षेत्र अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया। अंग्रेजी शासन के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था को नया स्वरूप दिया गया। वर्ष 1861 में बिलासपुर को जिला बनाया गया और कुछ वर्षों बाद नगर पालिका की स्थापना हुई।


अंग्रेजों ने सड़क, राजस्व व्यवस्था और सरकारी कार्यालयों के विकास पर ध्यान दिया। इससे शहर में नई प्रशासनिक व्यवस्था विकसित हुई और जनसंख्या भी बढ़ने लगी।


इसी दौर ने आधुनिक बिलासपुर की नींव रखी, जिसका प्रभाव आज भी शहर की संरचना और प्रशासन में दिखाई देता है।

सावन में भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे भूपेश बघेल, बिल्हा के मोहभठ्ठा में हजारों श्रद्धालुओं के बीच हुआ भव्य पूजन

बिलासपुर (बिल्हा) – सावन मास के पावन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर जिले के बिल्हा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मोहभठ्ठा...