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Saturday, August 8, 2026

आधुनिक तकनीक से ट्रैक मेंटेनेंस को रफ्तार


बिलासपुर -दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अपने विस्तृत रेल नेटवर्क पर सुरक्षित और सुचारू रेल संचालन को मजबूत करने के लिए ट्रैक रखरखाव के काम में आधुनिक तकनीक और बेहतर कार्ययोजना का इस्तेमाल किया है। लगभग 5,500 ट्रैक किलोमीटर के नेटवर्क पर मौजूदा वित्तीय वर्ष में अत्याधुनिक ट्रैक मशीनों की मदद से 2,042 किलोमीटर प्लेन ट्रैक टैम्पिंग, 907 टर्नआउट टैम्पिंग, 102 किलोमीटर डीप बैलास्ट स्क्रीनिंग, 50 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण और 58 टर्नआउट का नवीनीकरण पूरा किया गया है। खास बात यह है कि इन कार्यों को उपलब्ध ट्रैफिक ब्लॉकों का बेहतर उपयोग करते हुए समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। नागपुर-झारसुगुड़ा मुख्य रेलखंड पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को देखते हुए ट्रैक की गुणवत्ता और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एसईसीआर के

 विभिन्न मंडलों में 92 अत्याधुनिक ट्रैक मशीनें कार्यरत हैं, जिनके संचालन और रखरखाव के लिए करीब 900 प्रशिक्षित कर्मचारी चौबीसों घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आधुनिक मशीनों और कुशल कर्मचारियों के इस समन्वय से ट्रैक की ज्यामितीय गुणवत्ता बनाए रखने,

 


रखरखाव की प्रक्रिया को तेज करने और रेल परिचालन की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल रही है। एसईसीआर की यह पहल बताती है कि रेलवे केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि उस रफ्तार को सुरक्षित बनाए रखने के लिए ट्रैक की मजबूती और नियमित रखरखाव पर भी उतना ही ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि यात्रियों और माल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण इस रेल नेटवर्क में सुरक्षित, सुचारू और समयबद्ध परिचालन सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।

Monday, August 3, 2026

कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......



रेल सुरक्षा में नई क्रांति का 'कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......


बिलासपुर :–भारतीय रेलवे अब सुरक्षा के उस नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर अत्याधुनिक तकनीक के जरिए प्रभावी रोक लगाई जाएगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अपने पूरे 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। रेलवे संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है, आधुनिक संचार टावर स्थापित किए जा रहे हैं और लोकोमोटिवों में कवच उपकरण फिट किए जा रहे हैं। अब तक 238 इंजनों में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। यह परियोजना केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के सुरक्षा इतिहास में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जिससे लाखों यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक होगा।



बिलासपुर मंडल में बिलासपुर–रायगढ़ रेलखंड पर कवच की कमीशनिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि बिलासपुर–चांपा रेलखंड में फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। नागपुर मंडल के नागपुर–दुर्ग रेलखंड पर एसआईएल-4 स्तर की कमीशनिंग के लिए साइट परीक्षण और लोको ट्रायल जारी हैं। इसी क्रम में 23 जुलाई को कलमना–सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड पर ब्रेकिंग मोड ऑन के साथ एसआईएल-4 स्तर का कवच ट्रायल पूरी तरह सफल रहा। इस परीक्षण के दौरान सिग्नल रिस्पॉन्स, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण और आपातकालीन एसओएस प्रणाली की कार्यक्षमता को परखा गया, जिसमें सभी परीक्षण सफल रहे। वहीं रायपुर मंडल के दुर्ग–मांढर रेलखंड पर भी परियोजना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रही है।


'कवच' भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित विश्वस्तरीय एसआईएल-4 प्रमाणित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह तकनीक लोको पायलट को वास्तविक समय में सिग्नल की स्थिति, अधिकतम अनुमत गति, लक्ष्य दूरी और मूवमेंट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराती है। यदि चालक किसी कारणवश निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करता या खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति बनती है, तो कवच बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित रोक देता है। यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे की सबसे भरोसेमंद और भविष्य की सुरक्षा तकनीकों में शामिल किया जा रहा है।



इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सिग्नल उल्लंघन ही नहीं रोकती, बल्कि आमने-सामने, पीछे से या साइड से होने वाली संभावित ट्रेन टक्कर को भी रोकने में सक्षम है। घने कोहरे या कम दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी यह सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करती है। खतरे वाले सिग्नल को पार करने से पहले ट्रेन को स्वतः रोकना, निर्धारित गति सीमा से अधिक होने पर स्वचालित ब्रेक लगाना, स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन कराना, लेवल क्रॉसिंग के निकट स्वतः हॉर्न बजाना और किसी आपात स्थिति में स्टॉप ऑन साइट (एसओएस) संदेश प्रसारित कर आसपास की ट्रेनों को स्वतः नियंत्रित करना इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। इससे रेल परिचालन न केवल अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि समयबद्धता और संचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा.....


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में चरणबद्ध तरीके से 'कवच' के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर तकनीक के बल पर सुरक्षा का नया अध्याय लिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जब पूरा 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क इस अत्याधुनिक प्रणाली से जुड़ जाएगा, तब रेल दुर्घटनाओं की आशंका में भारी कमी आएगी और यात्रियों का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह सुरक्षा कवच केवल रेलवे की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य की मजबूत पहचान बनकर उभर रहा है...........





भूपेश बघेल के काफिले पर हमले की रविंद्र सिंह ने की निंदा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

बिलासपुर –जिला शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं असम प्रभारी भूपेश बघेल के काफिले पर अस...