अनुकंपा नियुक्ति वंशानुगत अधिकार नहीं, 16 साल बाद दायर याचिका खारिज; बिलासपुर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति किसी कर्मचारी के परिवार का खानदानी या वंशानुगत अधिकार नहीं, बल्कि कर्मचारी की मृत्यु के बाद उत्पन्न तत्काल आर्थिक संकट से परिवार को राहत देने की एक विशेष व्यवस्था है। न्यायालय ने एक शासकीय कर्मचारी की बेटी द्वारा पिता के निधन के करीब 16 वर्ष बाद दायर अनुकंपा नियुक्ति की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य स्वतः समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति केवल
सहानुभूति के आधार पर नहीं दी जा सकती और इसके लिए निर्धारित नियमों एवं समय-सीमा का पालन अनिवार्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों से हटकर किसी को नियुक्ति देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी नजीर माना जा रहा है, जिससे स्पष्ट संदेश गया है कि इस व्यवस्था का लाभ केवल वास्तविक और तत्काल आर्थिक आवश्यकता की स्थिति में ही दिया जा सकता है, न कि वर्षों बाद इसे अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है।


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