बिलासपुर सेंट्रल जेल में कैदी की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, DGP और गृह सचिव 4 अगस्त को होंगे तलब
एक लाख मुआवजे को सुप्रीम कोर्ट ने माना नाकाफी, कस्टोडियल डेथ में FIR और आपराधिक जांच पर मांगा जवाब
बिलासपुर स्थित केंद्रीय जेल में विचाराधीन कैदी श्रवण सूर्यवंशी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। मृतक के परिजनों की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को 4 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देश पर परिजनों को दिए गए एक लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि हिरासत में हुई मौत के इस मामले में अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और आपराधिक जांच की दिशा में क्या ठोस कार्रवाई हुई है। उल्लेखनीय है कि 18 जनवरी 2024 को सीपत थाना पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत 6 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामदगी के आरोप में श्रवण सूर्यवंशी को गिरफ्तार कर बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा था। 21 जनवरी को जेल में उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 22 जनवरी को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 176 के तहत हुई न्यायिक जांच में यह सामने आया कि उसकी मौत सिर में लगी गंभीर चोट से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई थी। इसके बाद परिजनों ने दोषी पुलिस एवं जेल अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कहा कि उसमें न तो एफआईआर दर्ज न होने का संतोषजनक कारण बताया गया है और न ही आपराधिक जांच की प्रगति का स्पष्ट विवरण दिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में राज्य के शीर्ष अधिकारियों को अदालत के समक्ष जवाब देना होगा, जिससे कस्टोडियल डेथ के इस बहुचर्चित प्रकरण में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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