1111 भक्तों के सामूहिक ध्यान संग राणी सती दादी का अविस्मरणीय महामंगल सम्पन्न
बिलासपुर –पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, कलयुग के 5127वें वर्ष के इस दुर्लभ संयोग पर रविवार शाम 18.01 बजे बिलासपुर स्थित गोविंदम पैलेस में 1111 भक्तों ने एक साथ एकाग्रचित होकर राणी सती दादी का ध्यान कर वैश्विक शांति एवं शहर की खुशहाली की कामना की। विश्व ध्यान दिवस की तिथि 5127/10/01/01/01 और ग्यारह एक के इस अद्भुत अंकीय मेल ने आयोजन को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया। सूरत की सुरभि बिजुरका के मधुर स्वर में दोपहर 3.30 बजे से रात 8 बजे तक हुए महामंगल पाठ में भक्तगण झूमते रहे। इसी बीच दादीजी की हल्दी, मेंहदी और चुनरी संस्कार सहित जीवंत झांकी के माध्यम से उनकी दिव्य जीवनी का सचित्र प्रदर्शन किया गया। मृदंग व ढोल नगाड़ों की गूंज के बीच बनारस के पांडित्य जनों द्वारा की गई दादीजी की भव्य गंगा आरती ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। आयोजन में लगभग तीन
हजार भक्तों ने छप्पन भोग एवं प्रसाद स्वरूप भोजन का आनंद लिया। कोलकाता के कलाकारों की नृत्य नाटिका और बनारस शैली की आरती ने समारोह में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में नवलकिशोर तुलस्यान, सीए आनंद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट प्रवीण तुलस्यान सहित अग्रवाल समाज, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, पूर्व विधायक रश्मि सिंह और हजारों भक्तों का योगदान रहा। पहली बार प्रदर्शित दादीजी के तनधन जी सहित ज्योति विलीन होने की झांकी देखने बिल्हा, कोटा, तखतपुर, कोरबा, नैला, भाटापारा सहित दूर-दूर से भक्त पहुंचे। पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों की पुत्रवधू एवं अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ही कलयुग में नारायणी रूप में राणी सती दादी बनकर झुंझुनू में दिव्य ज्योति में विलीन हुई थीं। इस भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन ने बिलासपुर की पावन धरा को भक्तिमय रंग से सराबोर कर दिया।



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