Monday, August 3, 2026

कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......



रेल सुरक्षा में नई क्रांति का 'कवच', दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 2430 किमी नेटवर्क पर दौड़ेगी हाईटेक सुरक्षा.......


बिलासपुर :–भारतीय रेलवे अब सुरक्षा के उस नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां मानवीय भूल से होने वाली रेल दुर्घटनाओं पर अत्याधुनिक तकनीक के जरिए प्रभावी रोक लगाई जाएगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अपने पूरे 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 'कवच' को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। रेलवे संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है, आधुनिक संचार टावर स्थापित किए जा रहे हैं और लोकोमोटिवों में कवच उपकरण फिट किए जा रहे हैं। अब तक 238 इंजनों में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। यह परियोजना केवल तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के सुरक्षा इतिहास में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जिससे लाखों यात्रियों का सफर पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक होगा।



बिलासपुर मंडल में बिलासपुर–रायगढ़ रेलखंड पर कवच की कमीशनिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि बिलासपुर–चांपा रेलखंड में फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। नागपुर मंडल के नागपुर–दुर्ग रेलखंड पर एसआईएल-4 स्तर की कमीशनिंग के लिए साइट परीक्षण और लोको ट्रायल जारी हैं। इसी क्रम में 23 जुलाई को कलमना–सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड पर ब्रेकिंग मोड ऑन के साथ एसआईएल-4 स्तर का कवच ट्रायल पूरी तरह सफल रहा। इस परीक्षण के दौरान सिग्नल रिस्पॉन्स, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण और आपातकालीन एसओएस प्रणाली की कार्यक्षमता को परखा गया, जिसमें सभी परीक्षण सफल रहे। वहीं रायपुर मंडल के दुर्ग–मांढर रेलखंड पर भी परियोजना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार तेजी से आगे बढ़ रही है।


'कवच' भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित विश्वस्तरीय एसआईएल-4 प्रमाणित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह तकनीक लोको पायलट को वास्तविक समय में सिग्नल की स्थिति, अधिकतम अनुमत गति, लक्ष्य दूरी और मूवमेंट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराती है। यदि चालक किसी कारणवश निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करता या खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति बनती है, तो कवच बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित रोक देता है। यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे की सबसे भरोसेमंद और भविष्य की सुरक्षा तकनीकों में शामिल किया जा रहा है।



इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल सिग्नल उल्लंघन ही नहीं रोकती, बल्कि आमने-सामने, पीछे से या साइड से होने वाली संभावित ट्रेन टक्कर को भी रोकने में सक्षम है। घने कोहरे या कम दृश्यता जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी यह सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करती है। खतरे वाले सिग्नल को पार करने से पहले ट्रेन को स्वतः रोकना, निर्धारित गति सीमा से अधिक होने पर स्वचालित ब्रेक लगाना, स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन कराना, लेवल क्रॉसिंग के निकट स्वतः हॉर्न बजाना और किसी आपात स्थिति में स्टॉप ऑन साइट (एसओएस) संदेश प्रसारित कर आसपास की ट्रेनों को स्वतः नियंत्रित करना इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। इससे रेल परिचालन न केवल अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि समयबद्धता और संचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा.....


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में चरणबद्ध तरीके से 'कवच' के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर तकनीक के बल पर सुरक्षा का नया अध्याय लिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जब पूरा 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क इस अत्याधुनिक प्रणाली से जुड़ जाएगा, तब रेल दुर्घटनाओं की आशंका में भारी कमी आएगी और यात्रियों का भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह सुरक्षा कवच केवल रेलवे की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य की मजबूत पहचान बनकर उभर रहा है...........





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